Posts

Showing posts from April, 2020

" रिक्शे वाला ,, कामयाबी आपके ख़ुशी में छुपी है, और अच्छे दिनों की उम्मीद में अपने वर्तमान को ख़राब नहीं करें। और न ही कम अच्छे दिनों में ज्यादा अच्छे दिनों को याद करके अपने वर्तमान को ख़राब करना है।

Image
रिक्शे वाला  एक बार एक अमीर आदमी कहीं जा रहा होता है तो उसकी कार ख़राब हो जाती है। उसका कहीं पहुँचना बहुत जरुरी होता है। उसको दूर एक पेड़ के नीचे एक रिक्शा दिखाई देता है। वो उस रिक्शा वाले पास जाता है। वहा जाकर देखता है कि रिक्शा वाले ने अपने पैर हैंडल के ऊपर रखे होते है। पीठ उसकी अपनी सीट पर होती है और सिर जहा सवारी बैठती है उस सीट पर होती है ।  और वो मज़े से लेट कर गाना गुन-गुना रहा होता है। वो अमीर व्यक्ति रिक्शा वाले को ऐसे बैठे हुए देख कर बहुत हैरान होता है कि एक व्यक्ति ऐसे बेआराम जगह में कैसे रह सकता है, कैसे खुश रह सकता है। कैसे गुन-गुना सकता है।  वो उसको चलने के लिए बोलता है। रिक्शा वाला झट से उठता है और उसे 20 रूपए देने के लिए बोलता है।   रास्ते में वो रिक्शा वाला वही गाना गुन-गुनाते हुए मज़े से रिक्शा खींचता है। वो अमीर व्यक्ति एक बार फिर हैरान कि एक व्यक्ति 20 रूपए लेकर इतना खुश कैसे हो सकता है। इतने मज़े से कैसे गुन-गुना सकता है। वो थोडा इर्ष्यापूर्ण  हो जाता है और रिक्शा वाले को समझने के लिए उसको अपने बंगले में रात को खाने के लिए बुला ...

'दुर्योधन' या 'सुयोधन

Image
'दुर्योधन' या 'सुयोधन ये सत्य है महाभारत काल की 'दुर्योधन' या 'सुयोधन' , जिसके इर्द-गिर्द ही अधर्म ने और उसके नेत्रहीन पिता ने अपनी विजय का ताना बाना बुना था , इस जयसंहिता का मुख्य पात्र था | और दुर्योधन का अहंकार भाव ही इस युद्ध की कटु परिणति का मुख्य कारण था | वो दुर्योधन अंत तक भी वासुदेव कृष्ण की धर्म स्थापना में आसक्ति को नहीं समझ पाया और अपने भाई-बान्धवों का समूल नाश करवा बैठा | पर क्या दुर्योधन का इस परिदृश में उपस्थित होना और उसकी अनीति ही महाभारत के विनाशकारी समर का कारण था ? , शायद नहीं |  दुर्योधन को ही सिर्फ दोष देना ऐसा ही होगा जैसा दीये की कालिख के लिए केवल लौ को ही दोष देना और कालिख में तेल की भूमिका को नगण्य मानना |पर जो भी हो , दुर्योधन के नियमपूर्ण अधर्म और वासुदेव कृष्ण के नियमहीन धर्म के परस्पर युद्ध में धर्म का ही पलड़ा भारी रहा और इसी विजय ने इस जयसंहिता को 'धर्मग्रन्थ' का दर्जा दे दिया | पर दुर्योधन ने संसार को कुछ सबक दिए जो आने वाले समय में सभी समाजों को चरित्र ही बन गया , जैसे भीम की हत्या की कोशिश और छल-बल द्वारा पांड...

काफिर देश में तबलीगी जमात...

Image
काफिर देश में तबलीगी जमात... यह हमारे राजनीतिक-बौद्धिक जीवन का बैरोमीटर है कि जिस संस्था के काम से पिछले सौ साल से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है, और ठीक राजधानी दिल्ली में जिसका मुख्यालय है, उसके बारे में हम नगण्य जानते हैं। कोरोना के आकस्मिक दुर्योग से ही "तबलीगी जमात" का नाम अभी घर-घर पहुंचा। तभी यह भी पता चला कि बड़े-बड़े लोगों को उसके बारे में कुछ पता नहीं। ‘तबलीग’ यानी प्रचार को इस्लामी शब्दावली में ‘दावा’ भी कहते हैं, जिस का अर्थ है, आमंत्रित करना, प्रेरित करना, उस पर बल देना। सो तबलीगी जमात 'सच्चा इस्लाम' अपनाने, और हरेक गैर-इस्लामी चीज छोड़ने का प्रचार/दावा करती है। इसमें खान-पान, रहन-सहन, कपड़े-लत्ते, भाषा- बोली, विचार-मान्यताएं, दोस्ती-दुश्मनी, आदि सब कुछ शामिल हैं। अपने जीवन के सभी काम प्रोफेट मुहम्मद के वचन, कर्म और मॉडल पर ढालना। तबलीगी जमात का बड़ा सरल संदेश है - ‘ऐ मुसलमानों! मुसलमान बनो।’                                                   ...

कुतुबुद्दीन ऐबक, और क़ुतुबमीनार

Image
कुतुबुद्दीन ऐबक, और क़ुतुबमीनार किसी भी देश पर शासन करना है तो उस देश के लोगों का ऐसा ब्रेनवाश कर दो कि वो अपने देश, अपनी संसकृति और अपने पूर्वजों पर गर्व करना छोड़ दें. इस्लामी हमलावरों और उनके बाद अंग्रेजों ने भी भारत में यही किया. हम अपने पूर्वजों पर गर्व करना भूलकर उन अत्याचारियों को महान समझने लगे जिन्होंने भारत पर बे हिसाब जुल्म किये थे. अगर आप दिल्ली घुमने गए है तो आपने कभी विष्णू स्तम्भ (क़ुतुबमीनार) को भी अवश्य देखा होगा. जिसके बारे में बताया जाता है कि उसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनबाया था. हम कभी जानने की कोशिश भी नहीं करते हैं कि कुतुबुद्दीन कौन था, उसने कितने बर्ष दिल्ली पर शासन किया, उसने कब विष्णू स्तम्भ (क़ुतुबमीनार) को बनवाया या विष्णू स्तम्भ (कुतूबमीनार) से पहले वो और क्या क्या बनवा चुका था ? कुतुबुद्दीन ऐबक, मोहम्मद गौरी का खरीदा हुआ गुलाम था. मोहम्मद गौरी भारत पर कई हमले कर चुका था मगर हर बार उसे हारकर वापस जाना पडा था. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की जासूसी और कुतुबुद्दीन की रणनीति के कारण मोहम्मद गौरी, तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को हराने में कामयाबी रहा और ...