Posts

Showing posts from August, 2022

*भारत का नया गीत**आओ बच्चों तुम्हे दिखायें, शैतानी शैतान की।**नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।**बड़े-बड़े नेता शामिल हैं, घोटालों की थाली में।**सूटकेश भर के चलते हैं, अपने यहाँ दलाली में।।**देश-धर्म की नहीं है चिंता, चिन्ता निज सन्तान की।**नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।**चोर-लुटेरे भी अब देखो, सांसद और विधायक हैं।**सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये, सचमुच के खलनायक हैं।।**भिखमंगों में गिनती कर दी, भारत देश महान की।**नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।**जनता के आवंटित धन को, आधा मन्त्री खाते हैं।**बाकी में अफसर ठेकेदार, मिलकर मौज उड़ाते हैं।।**लूट खसोट मचा रखी है, सरकारी अनुदान की।

Image
*भारत का नया गीत* *आओ बच्चों तुम्हे दिखायें, शैतानी शैतान की।* *नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।* *बड़े-बड़े नेता शामिल हैं, घोटालों की थाली में।* *सूटकेश भर के चलते हैं, अपने यहाँ दलाली में।।* *देश-धर्म की नहीं है चिंता, चिन्ता निज सन्तान की।* *नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।* *चोर-लुटेरे भी अब देखो, सांसद और विधायक हैं।* *सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये, सचमुच के खलनायक हैं।।* *भिखमंगों में गिनती कर दी, भारत देश महान की।* *नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।* *जनता के आवंटित धन को, आधा मन्त्री खाते हैं।* *बाकी में अफसर ठेकेदार, मिलकर मौज उड़ाते हैं।।* *लूट खसोट मचा रखी है, सरकारी अनुदान की।* *नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।।* *थर्ड क्लास अफसर बन जाता, फर्स्ट क्लास चपरासी है।* *होशियार बच्चों के मन में, छायी आज उदासी है।।* *गंवार सारे मंत्री बन गये, मेधावी आज खलासी है।* *आओ बच्चों तुम्हें दिखायें, शैतानी शैतान की।।* *नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की।*

क्या आप जानते हैं कि....मंदिरों में (गोल) गुम्बद क्यों बनाया जाता है....???? दरअसल यह एक ऐसा राज है...... जिसे जान लेने के बाद मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति को भी यह संदेह नहीं रह जाएगा कि..... ताजमहल... लाल किला , और ... तथाकथित रूप से मुसरिमों के..... सारे के सारे मजार ... हिन्दू मंदिर ही हैं.....

Image
 क्या आप जानते हैं कि....मंदिरों में (गोल) गुम्बद क्यों बनाया जाता है....???? दरअसल यह एक ऐसा राज है...... जिसे जान लेने  के बाद मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति को भी यह संदेह नहीं रह जाएगा कि..... ताजमहल... लाल किला , और ... तथाकथित रूप से मुसरिमों के..... सारे के सारे  मजार ... हिन्दू मंदिर ही हैं.....  जिसे मुगलों ने हम हिनूओं को अपमानित करने के लिए....  या तो महजिद बना दिया.....  या फिर ... उन मंदिरों में लाशें गाड़कर ... उसे मजार  कहना शुरू कर दिया....! असल में.... हिन्दू सनातन धर्म ... एक बेहद ही उन्नत और पूर्णतः वैज्ञानिक धर्म है.......  और, हिन्दू धर्म में हर क्रिया... हर पूजा, हर मंत्र एवं हर त्योहार का एक ठोस वैज्ञानिक आधार है.....  जिस से सम्बंधित लेख हमलोग समय समय पर प्रकाशित करते ही रहते हैं....! दूसरे शब्दों में ... हिन्दू धर्म को आप एक पूर्णतः  वैज्ञानिक धर्म की संज्ञा भी दे सकते हो....! इसीलिए, हिन्दुओं के पूजा स्थल ... अर्थात मंदिर भी.... पूर्णतः वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही बनाये जाते रहे हैं....! हिन्दू धर्म में ... ॐ शब्द... मंत्र...

चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं। सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा? महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो। विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।

Image
 चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।  सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा? महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो। विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है। भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,  उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे। यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया। राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे। उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, को...

सेठ रामदास जी गुड़वाले - 1857 के महान क्रांतिकारी । सेठ रामदास जी गुडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ और बेंकर थे। और अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के गहरे दोस्त थे। इनका जन्म दिल्ली में एक अग्रवाल परिवार में हुआ था। इनके परिवार ने दिल्ली में पहली कपड़े की मिल की स्थापना की थी। उनकी अमीरी की एक कहावत थी “रामदास जी गुड़वाले के पास इतना सोना चांदी जवाहरात है की उनकी दीवारो से वो गंगा जी का पानी भी रोक सकते है”।

Image
 सेठ रामदास जी गुड़वाले - 1857 के महान क्रांतिकारी । सेठ रामदास जी गुडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ और बेंकर थे। और अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के गहरे दोस्त थे। इनका जन्म दिल्ली में एक अग्रवाल परिवार में हुआ था। इनके परिवार ने दिल्ली में पहली कपड़े की मिल की स्थापना की थी। उनकी अमीरी की एक कहावत थी “रामदास जी गुड़वाले के पास इतना सोना चांदी जवाहरात है की उनकी दीवारो से वो गंगा जी का पानी भी रोक सकते है”। जब 1857 में मेरठ से आरम्भ होकर क्रांति की चिंगारी जब दिल्ली पहुँची तो मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर को 1857 की सैनिक क्रांति का नायक घोषित कर दिया गया। दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासतों की भारतीय सेनाओं ने दिल्ली में डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की समस्या पैदा हो गई । बादशाह का खजाना खाली था । एक दिन उन्होंने अपनी रानियों के गहने मंत्रियों के सामने रख दिये। रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र थे | रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होंने अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह के हवाले कर दी और कह दिया "मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जायेगा...

आपको यह तो पता होगा कि शून्य के आविष्कार से लेकर चांद पर पानी की खोज भी भारतीय वैज्ञानिकों ने ही की थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत का अहम योगदान रहा है? 'भारत की मौसम महिला' के तौर पर पहचानी जाने वाली अन्ना मणि इसकी एक मिसाल हैं।

Image
 आपको यह तो पता होगा कि शून्य के आविष्कार से लेकर चांद पर पानी की खोज भी भारतीय वैज्ञानिकों ने ही की थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत का अहम योगदान रहा है?  'भारत की मौसम महिला' के तौर पर पहचानी जाने वाली अन्ना मणि इसकी एक मिसाल हैं। अन्ना मणि के बारे में कम लोग जानते होंगे, लेकिन भारत को मौसम विज्ञान के क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने में इनका अहम योगदान रहा है। अन्ना मणि ने मौसम का अवलोकन करने वाले उपकरणों के डिजाइन में अहम योगदान दिया है। इन्हीं की बदौलत भारत आज मौसम की प्रणाली को समझने, मापने और सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं। 23 अगस्त 1918 को जन्मी अन्ना मणि, शुरुआत में अन्ना चिकित्सा के क्षेत्र में जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें भौतिकी विषय से अधिक लगाव था। यही कारण रहा कि उन्होंने मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से भौतिकी और रसायन विज्ञान में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद, भौतिकी में आगे की पढ़ाई के लिए वह 1945 में इंपीरियल कॉलेज, लंदन भी गईं। यहाँ से उन्होंने मौसम संबंधी उपकरणों की विशेषज्ञता हासिल की। 1948 में भारत वापस लौटने के ब...

बिहार के #गया जिले के #गहलौर_गाँव के रहने वाले दशरथ मांझी ने अकेले ही 22 वर्ष के अथक परिश्रम के बाद केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर पहाड़ को काट कर रास्ता बना डाला ताकि उनके गांव को चिकित्सा सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके। 1982 में इस सड़क के बन जाने के बाद अतरी और वज़ीरगंज प्रखंड की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर मात्र रह गयी।

Image
 "माउंटेन मैन" के नाम से प्रसिद्ध महामानव #दशरथ_मांझी जी को उनकी पुण्यतिथि पर #श्रद्धांजलि।💐 पत्नी की सही समय पर अस्पताल दुर होने के कारण इलाज नहीं मिल पाने से मृत्यु हो गई थी, जिसके चलते हाथ से ही पहाड़ का सिना चिर दिया ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा नहीं हो, बिहार के #गया जिले के #गहलौर_गाँव के रहने वाले दशरथ मांझी  ने अकेले ही 22 वर्ष के अथक परिश्रम के बाद केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर पहाड़ को काट कर रास्ता बना डाला ताकि उनके गांव को चिकित्सा सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके।  1982 में इस सड़क के बन जाने के बाद अतरी और वज़ीरगंज प्रखंड की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर मात्र रह गयी।  #MountainMan #दशरथ_मांझी 🏔️🗻 मैं सरकार से मांग करता हूं कि इन्हें #भारत_रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।

मृत्युभोजकेविरोध पर बहुत लिखा जा रहा है आजकल.. पर मेरा मत जरा अलग है.. मृत्युभोज कुरीति नहीं है. समाज और रिश्तों को सँगठित करने के अवसर की पवित्र परम्परा है, हमारे पूर्वज हमसे ज्यादा ज्ञानी थे ! आज मृत्युभोज का विरोध है, कल विवाह भोज का भी विरोध होगा.. हर उस सनातन परंपरा का विरोध होगा जिससे रिश्ते और समाज मजबूत होता है.. इसका विरोध करने वाले ज्ञानियों हमारे बाप दादाओ ने रिश्तों को जिंदा रखने के लिए ये परम्पराएं बनाई हैं!..., ये सब बंद हो गए तो रिश्तेदारों, सगे समबंधियों, शुभचिंतकों को एक जगह एकत्रित कर मेल जोल का दूसरा माध्यम क्या है,.. दुख की घड़ी मे भी रिश्तों को कैसे प्रगाढ़ किया जाय ये हमारे पूर्वज अच्छे से जानते थे..

Image
 मृत्युभोजकेविरोध पर बहुत लिखा जा रहा है आजकल..  पर मेरा मत जरा अलग है.. मृत्युभोज कुरीति नहीं है.  समाज और रिश्तों को सँगठित करने के अवसर की पवित्र परम्परा है, हमारे पूर्वज हमसे ज्यादा ज्ञानी थे ! आज मृत्युभोज का विरोध है, कल विवाह भोज का भी विरोध होगा.. हर उस सनातन  परंपरा का विरोध होगा जिससे रिश्ते और समाज मजबूत होता है.. इसका विरोध करने वाले ज्ञानियों हमारे बाप दादाओ ने रिश्तों को जिंदा रखने के लिए ये परम्पराएं बनाई हैं!..., ये सब बंद हो गए तो रिश्तेदारों, सगे समबंधियों, शुभचिंतकों को एक जगह एकत्रित कर मेल जोल का दूसरा माध्यम क्या है,.. दुख की घड़ी मे भी रिश्तों को कैसे प्रगाढ़ किया जाय ये हमारे पूर्वज अच्छे से जानते थे..  हमारे बाप दादा बहुत समझदार थे,  वो ऐसे आयोजन रिश्तों को सहेजने और जिंदा रखने के किए करते थे. हाँ  ये सही है की  कुछ लोगों ने मृत्युभोज को  हेकड़ी और शान शौकत दिखाने का   माध्यम बना लिया, आप पूड़ी सब्जी ही खिलाओ.       कौन कहता है की 56 भोग परोसो..      कौन कहता है कि 4000-5000 ल...

आप केवल इतना भर जानते हैं कि #चक्रव्यूह में #अभिमन्यु मार गया था.. या फिर #कौरव महाबलियों ने उसे घेर कर मार दिया था ..!!?? रुकिये फिर आप .. #श्रीकृष्ण जिसके #गुरु हों और जो स्वंय #केशव ही का जो #भांजा भी हो ...?? उसको शौर्य को फिर आधा ही जानते हैं आप तब .. ?? कुछ तथ्यों से आप वंचित हैं ..!! क्योंकि उस लड़ाई में #अभिमन्यु ने जिन वीरपुत्र योद्धाओं को मार कर वीरगति पाई थी ..? उनको जान लीजिये ..

Image
 आप केवल इतना भर जानते हैं कि #चक्रव्यूह में #अभिमन्यु मार गया था..  या फिर #कौरव  महाबलियों ने उसे घेर कर मार दिया था ..!!??  रुकिये फिर आप .. #श्रीकृष्ण जिसके #गुरु हों और जो स्वंय #केशव ही का जो #भांजा भी हो ...?? उसको शौर्य को फिर आधा ही जानते हैं आप तब .. ?? कुछ तथ्यों से आप वंचित हैं ..!! क्योंकि उस लड़ाई में #अभिमन्यु ने जिन वीरपुत्र योद्धाओं को मार कर वीरगति पाई थी ..? उनको जान लीजिये .. ●#दुर्योधन का पुत्र #लक्ष्मण ●कर्ण का छोटा पुत्र.  ●अश्मका का बेटा ●शल्या का छोटा भाई ●शल्या के पुत्र रुक्मरथ ● दृघलोचन Drighalochana ● कुंडवेधी Kundavedhi ● सुषेण Sushena ● वसत्य Vasatiya ● क्रथा और कई योद्धा ... और ये तब था जब ... उस चक्रव्यूह को जिसे अभिमन्यु को भेदना था ..उसके प्रत्येक द्वार - पहले से लेकर सातवें  पर योद्धाओं को देखिये - १) #अश्वथामा २) #दुर्योधन ३)#द्रोणाचार्य 4) #कर्ण ५) #कृपाचार्य ६) #दुशासन 7) #शाल्व (दुशासन के पुत्र) अभिमन्यु के प्रवेश के बाद ही #जयद्रथ ने ..प्रथम प्रवेशद्वार पर #पांडवों के प्रवेश को रोक दिया था .. थोड़ा रुकिये.. #चक्रव्यूह...

जाने_यज्ञकुंड - कितनेप्रकारकेहोते_हैं ? यज्ञ कुंड मुख्यत : आठ__प्रकार के होते हैं और सभी का प्रयोजन अलग अलग होता हैं ।

Image
 जाने_यज्ञकुंड 🔥 #कितनेप्रकारकेहोते_हैं ?  यज्ञ कुंड मुख्यत : #आठ__प्रकार के होते हैं और सभी  का प्रयोजन अलग अलग होता हैं । 🔶1. योनी कुंड – योग्य पुत्र प्राप्ति हेतु । 🔶2. अर्ध चंद्राकार कुंड – परिवार मे सुख शांति हेतु । पर पति पत्नी दोनों को एक साथ आहुति देना पड़ती हैं । 🔶3. त्रिकोण कुंड – शत्रुओं पर पूर्ण विजय हेतु । 🔶4. वृत्त कुंड - जन कल्याण और देश मे शांति हेतु । 🔶5. सम अष्टास्त्र कुंड – रोग निवारण हेतु । 🔶6. सम षडास्त्र कुंड – शत्रुओ मे लड़ाई झगडे करवाने हेतु । 🔶7. चतुष् कोणा स्त्र कुंड – सर्व कार्य की सिद्धि हेतु । 🔶8. पदम कुंड – तीव्रतम प्रयोग और मारण प्रयोगों से बचने हेतु । तो आप समझ ही गए होंगे की सामान्यतः हमें चतुर्वर्ग के आकार के इस कुंड का ही प्रयोग करना हैं ।  ध्यान रखने योग्य बाते :- अब तक आपने शास्त्रीय बाते समझने का प्रयास किया यह बहुत जरुरी हैं । क्योंकि इसके बिना सरल बाते पर आप गंभीरता से विचार नही कर सकते ।  सरल विधान का यह मतलब कदापि नही की आप गंभीर बातों को ह्र्द्यगमन ना करें । जप के बाद कितना और कैसे हवन किया जाता हैं ?  कित...

भारतीय होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्रों से खुद भी बचें और औरों को भी बचाएं , चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।

Image
 चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।  सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा? महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो। विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है। भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया। श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,  उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे। यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया। राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे। उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, को...

भगवान श्री राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले #लक्ष्मण जी कैसे #राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!! यदि बिना बताए जाऊंगा तो रो रोके जान दे देगी और यदि बताया तो साथ जाने की ज़िद्द करने लगेगी और कहेगी कि यदि सीता जी अपने पति के साथ जा सकती हैं तो मैं क्यों नहीं!!

Image
 भगवान श्री राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले #लक्ष्मण जी कैसे #राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!! यदि बिना बताए जाऊंगा तो रो रोके जान दे देगी और यदि बताया तो साथ जाने की ज़िद्द करने लगेगी और कहेगी कि यदि सीता जी अपने पति के साथ जा सकती हैं तो मैं क्यों नहीं!! यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- "आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकुंगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।" लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया। वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उससे प...

भारत पर शासन किसने किया? ध्यान दें कि यदि इस प्रश्न का उत्तर "मुगल" और "ब्रिटिश" है, तो हम मानसिक रूप से गुलाम हैं।

Image
  भारत पर शासन किसने किया? ध्यान दें कि यदि इस प्रश्न का उत्तर "मुगल" और "ब्रिटिश" है, तो हम मानसिक रूप से गुलाम हैं। भारत पर नंद वंश, शुंग, मौर्य, महामेघवाहन, गुप्त, चोल, पल्लव, कदंब, चेर, पांड्य, सातवाहन, यादव, शिलाहार, विजयनगर, राष्ट्रकूट का शासन था। चालुक्य, सोलंकी, जाट, राजपूत, बुंदेल, अहोम, सिख और यह मानसिक गुलामी तब तक दूर नहीं होगी जब तक हम आने वाली पीढ़ियों के दिमाग पर मराठों का शासन नहीं करेंगे। ये उतने ही नाम हैं जितने मुझे याद हैं। ऐसे सैकड़ों अन्य छोटे राज्य थे - पूरे भारत में साम्राज्य। महाभारत में वर्णित राज्य वास्तव में अस्तित्व में थे। कुरु, पांचाल, मगध, मत्स्य, कलिंग, गांधार, कठ, मल्ल, किरात, अंग राज्य अस्तित्व में थे। हम उन्हें केवल महाकाव्यों के रूप में खारिज नहीं कर सकते। एक छोटी लड़की जो मेरे साथ मेरे ऑफिस में काम करती है (जो अभी-अभी ढाई साल पहले कॉलेज से निकली है) कुछ दिन पहले बातें कर रही थी। गपशप का रंग "तर्क" प्रकार की ओर थोड़ा झुकना शुरू कर दिया। अंत में उससे पूछा "मुझे पांच मुगल बादशाहों के नाम बताओ"। फिर उसने दो मिनट ...

प्रश्न पूछने और उत्तर देने की इस अदभुत कला से ही उपनिषदो का प्रादुर्भाव हुआ।

Image
 महत्वपूर्ण संवाद साझा कर रहा हूं। जिसमे याज्ञवल्क्य और गार्गी का संवाद है। पढ़े और विचारे हमारे पूर्वज कितने जिज्ञासु और प्रज्ञावान थे। प्रश्न पूछने और उत्तर देने की इस अदभुत कला से ही उपनिषदो का प्रादुर्भाव हुआ।  गार्गी का प्रश्न याज्ञवल्क्य से, 'हे ऋषिवर! जल के बारे में कहा जाता है कि हर पदार्थ (पृथ्वी तत्व)इसमें घुलमिल जाता है तो यह जल किसमें जाकर मिल जाता है?' गार्गी का यह पहला प्रश्न बहुत ही सरल था, लेकिन याज्ञवल्क्य प्रश्न में उलझकर क्रोधित हो गए। बाद में उन्होंने आराम से और ठीक ही कह दिया कि जल अन्तत: वायु में ओतप्रोत हो जाता है। फिर गार्गी ने पूछ लिया कि वायु किसमें जाकर मिल जाती है और याज्ञवल्क्य का उत्तर था कि अंतरिक्ष लोक में। पर गार्गी याज्ञवल्क्य के हर उत्तर को प्रश्न में बदलती गई और इस तरह गंधर्व लोक किसमे ओतप्रोत हैं उत्तर-आदित्य लोक में आदित्य लोक चन्द्रलोक में, चन्द्रलोक  नक्षत्र लोक में, नक्षत्र लोक देवलोक में, देवलोक इन्द्रलोक में , इंद्रलोक ब्रह्मलोक लोक में और बात ब्रह्मलोक तक जा पहुंची और अन्त में गार्गी ने फिर वही प्रश्न पूछ लिया कि यह ब्रह्मलोक किस...