बिहार के #गया जिले के #गहलौर_गाँव के रहने वाले दशरथ मांझी ने अकेले ही 22 वर्ष के अथक परिश्रम के बाद केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर पहाड़ को काट कर रास्ता बना डाला ताकि उनके गांव को चिकित्सा सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके। 1982 में इस सड़क के बन जाने के बाद अतरी और वज़ीरगंज प्रखंड की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर मात्र रह गयी।

 "माउंटेन मैन" के नाम से प्रसिद्ध महामानव #दशरथ_मांझी जी को उनकी पुण्यतिथि पर #श्रद्धांजलि।💐



पत्नी की सही समय पर अस्पताल दुर होने के कारण इलाज नहीं मिल पाने से मृत्यु हो गई थी, जिसके चलते हाथ से ही पहाड़ का सिना चिर दिया ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा नहीं हो,


बिहार के #गया जिले के #गहलौर_गाँव के रहने वाले दशरथ मांझी  ने अकेले ही 22 वर्ष के अथक परिश्रम के बाद केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर पहाड़ को काट कर रास्ता बना डाला ताकि उनके गांव को चिकित्सा सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके। 


1982 में इस सड़क के बन जाने के बाद अतरी और वज़ीरगंज प्रखंड की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर मात्र रह गयी। 

#MountainMan #दशरथ_मांझी 🏔️🗻

मैं सरकार से मांग करता हूं कि इन्हें #भारत_रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।

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