क्या आप जानते हैं कि....मंदिरों में (गोल) गुम्बद क्यों बनाया जाता है....???? दरअसल यह एक ऐसा राज है...... जिसे जान लेने के बाद मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति को भी यह संदेह नहीं रह जाएगा कि..... ताजमहल... लाल किला , और ... तथाकथित रूप से मुसरिमों के..... सारे के सारे मजार ... हिन्दू मंदिर ही हैं.....

 क्या आप जानते हैं कि....मंदिरों में (गोल) गुम्बद क्यों बनाया जाता है....????


दरअसल यह एक ऐसा राज है...... जिसे जान लेने  के बाद मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति को भी यह संदेह नहीं रह जाएगा कि..... ताजमहल... लाल किला , और ... तथाकथित रूप से मुसरिमों के..... सारे के सारे  मजार ... हिन्दू मंदिर ही हैं..... 

जिसे मुगलों ने हम हिनूओं को अपमानित करने के लिए.... 

या तो महजिद बना दिया..... 

या फिर ... उन मंदिरों में लाशें गाड़कर ... उसे मजार  कहना शुरू कर दिया....!


असल में.... हिन्दू सनातन धर्म ... एक बेहद ही उन्नत और पूर्णतः वैज्ञानिक धर्म है....... 

और, हिन्दू धर्म में हर क्रिया... हर पूजा, हर मंत्र एवं हर त्योहार का एक ठोस वैज्ञानिक आधार है..... 

जिस से सम्बंधित लेख हमलोग समय समय पर प्रकाशित करते ही रहते हैं....!


दूसरे शब्दों में ... हिन्दू धर्म को आप एक पूर्णतः  वैज्ञानिक धर्म की संज्ञा भी दे सकते हो....!


इसीलिए, हिन्दुओं के पूजा स्थल ... अर्थात मंदिर भी.... पूर्णतः वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही बनाये जाते रहे हैं....!


हिन्दू धर्म में ... ॐ शब्द... मंत्रोच्चार, एवं घंटियों का बहुत महत्व है..... और, विज्ञान भी ये सिद्ध कर चुका है कि... अगर ॐ शब्द का उच्चारण ... 

तथा, घंटियों का लय... सही प्रकार से हो तो..... सिर्फ उसी से ... अनिद्रा, तनाव, उच्च रक्तचाप ... इत्यादि बीमारियों का उपचार किया जा सकता है....!


तो.... जब ॐ शब्द का उच्चारण किया जाता है तो..... ब्रह्माण्ड में वो शब्द गूंजने लगता है.... 

और, उसकी प्रतिध्वनि सुनाई देने लगती है...


लेकिन, हम मनुष्यों की क्षमता बेहद सीमित है ... 

जबकि, आकाश और ब्रह्माण्ड का फैलाव असीमित है....जिस कारण हम मनुष्यों को ब्रह्माण्ड से आती  प्रतिध्वनि  सुन पाना  संभव नहीं रह जाता है.


इसीलिए, मंदिरों में ब्रह्माण्ड की प्रतिलिपि .... गुम्बद के तौर पर बनायीं जाती है...... 


ताकि, धीरे से भी बोला गया ॐ शब्द या घंटियों की मधुर आवाज की ... स्पष्ट सुनाई दे सके.

तथा, उस आवाज की यथोचित प्रतिध्वनि उत्पन्न हो सके....!


यही कारण है कि हर मंदिर में ब्रह्माण्ड के प्रतिलिपि के तौर पर गुम्बद बनाया जाता है....!


लेकिन, जब मुगलों ने हमारे गुम्बदनुमा मंदिरों का अतिक्रमण शुरू कर दिया तो..... बाद में मंदिरों की संरचना में थोडा  बदलाव कर दिया गया..... 

ताकि, मुस्लिम उस पर कब्ज़ा ना कर सकें....!


अब इसी से समझा जा सकता है कि..... बृहद हिन्दुस्थान में जितने भी गुम्बदनुमा इमारत हैं..... वे सारे के सारे.... हिन्दुओं के मंदिर थे..... जिसे मुगलों ने या तो मस्जिद बना दिया या फिर उनमे लाशें दफना कर ...... मजार का रूप दे दिया...!


क्योंकि, यह तो बेहद ही सामान्य ज्ञान की बात है कि... पिस्लाम में ना तो मंत्रोच्चार होता है... 

और, ना ही उसमे घंटियों ही बजायी जाती है........ 


फिर, कोई मूर्ख भी यह बात समझ सकता है कि मस्जिद में गुम्बाद भला कोई क्यों बनवायेगा....?????


और, जहाँ तक मजारों  की बात है तो सालों पहले मरे मुर्दे... मजार के गुम्बद से.... आखिर किस चीज की प्रतिध्वनि सुनेंगे... जो मजारों में गुम्बद बनाया जाएगा..?????


याद रखें.... जानकारी ही बचाव है....


इसीलिए, हर चीज को समझने के किसी रॉकेट साइंस या वेद पुराण का प्रकांड विद्वान ही होना जरूरी नहीं है..

बल्कि, सामान्य समझ के इस्तेमाल से भी बहुत सी बातें समझ आ जाती है.


लेकिन, मंदिर की ये गुम्बन्दनुमा संरचना किसी को भी ये प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि... जब लगभग पूरी दुनिया जंगलों में नंग-धड़ंग रह रही थी..


उस समय भी हमारे वैज्ञानिक ऋषि-मुनि ये बात जानते थे कि ब्रह्मांड गुम्बदनुमा है... और, इस ब्रह्मांड में ऊर्जा का क्षय नहीं होता है.


तभी उन्होंने... मंदिरों के रूप में ब्रह्मांड की प्रतिकृति बनाने का उपाय सुझाया ताकि हम ब्रह्मांड की संरचना का अधिकतम लाभ ले सकें.


और, अपने इन्हीं गूढ़ ज्ञानों के बदौलत हम हिन्दू पहले भी विश्वगुरु थे..... 

और, आज भी हम में विश्वगुरु बनने की क्षमता रखते है....!


जय महाकाल...!!!

साभार

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