आपको यह तो पता होगा कि शून्य के आविष्कार से लेकर चांद पर पानी की खोज भी भारतीय वैज्ञानिकों ने ही की थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत का अहम योगदान रहा है? 'भारत की मौसम महिला' के तौर पर पहचानी जाने वाली अन्ना मणि इसकी एक मिसाल हैं।

 आपको यह तो पता होगा कि शून्य के आविष्कार से लेकर चांद पर पानी की खोज भी भारतीय वैज्ञानिकों ने ही की थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत का अहम योगदान रहा है?  'भारत की मौसम महिला' के तौर पर पहचानी जाने वाली अन्ना मणि इसकी एक मिसाल हैं।



अन्ना मणि के बारे में कम लोग जानते होंगे, लेकिन भारत को मौसम विज्ञान के क्षेत्र में स्वावलंबी बनाने में इनका अहम योगदान रहा है। अन्ना मणि ने मौसम का अवलोकन करने वाले उपकरणों के डिजाइन में अहम योगदान दिया है। इन्हीं की बदौलत भारत आज मौसम की प्रणाली को समझने, मापने और सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम हैं।


23 अगस्त 1918 को जन्मी अन्ना मणि, शुरुआत में अन्ना चिकित्सा के क्षेत्र में जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें भौतिकी विषय से अधिक लगाव था। यही कारण रहा कि उन्होंने मद्रास के प्रेसिडेंसी कॉलेज से भौतिकी और रसायन विज्ञान में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद, भौतिकी में आगे की पढ़ाई के लिए वह 1945 में इंपीरियल कॉलेज, लंदन भी गईं। यहाँ से उन्होंने मौसम संबंधी उपकरणों की विशेषज्ञता हासिल की। 1948 में भारत वापस लौटने के बाद अन्ना मणि ने मौसम विभाग में नौकरी की शुरुआत की। उन्होंने मौसम विज्ञान उपकरणों से संबंधित कई रिसर्च पेपर भी लिखे हैं।

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